यूपीआई लिमिटेड ने किसानों के कल्याण और चिरस्थायी कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए 100 से ज़्यादा सरपंचों को एकसाथ लाया
~ कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन किया गया और उसमें कृषि उपज में सुधार लाने के उपाय, कोविड के दौरान ज़रूरी एहतियात आदि प्रासंगिक विषयों पर ज़ोर दिया गया
मुंबई, भारत, 18 जून, 2021: पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ कृषि उत्पाद और सुविधाएं प्रदान करने वाली वैश्विक कंपनी यूपीएल लिमिटेड ने सरपंच मेले का आयोजन किया था, जिसमें महाराष्ट्र के 100 से ज़्यादा सरपंचों ने हिस्सा लिया। फसल की सुरक्षा के व्यापक समाधान, उपज और किसानों की कुल समृद्धि को बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर साथ मिलकर चर्चा करने के उद्देश्य से कंपनी ने यह पहल शुरू की।
इसके अलावा, यूपीएल लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने कोविड-19 के दौरान अपना ख्याल रखने के तरीकों पर भी जानकारी दी।
पहल के बारे में अपने विचार साझा करते हुए, यूपीएल लिमिटेड के क्षेत्रीय निदेशक-भारत श्री आशीष डोभाल ने कहा, “यूपीएल लिमिटेड में, हम अपनी क्षमताओं के अनुसार किसानों को लाभान्वित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारे कार्यक्रमों में कृषि उपज में सुधार लाने और उसके ज़रिए किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाता है। पहल में भाग लेने वाले सरपंच यूपीएल गांवों की संकल्पना के बारे में जानकर काफी खुश हुए, और जब उन्हें पता चला कि उन गावों को कितने लाभ मिल रहे हैं, तब उन्होंने इस संकल्पना को अपने गावों में लाने की उत्सुकता दर्शायी। हमारी इस पहल की सफलता से मैं काफी खुश हूं और उम्मीद करता हूं कि हम विभिन्न माध्यमों ज़रिए ज़्यादा से ज़्यादा किसानों तक पहुंच पाएंगे और उन्हें अधिक सक्षम बनाएंगे।"
पुणे जिले में तालुका जुन्नर रोहोकाडी गांव के सरपंच श्री सचिन घोलप ने इस मेले के बारे में कहा, "सत्र में हमें काफी अच्छी जानकारी मिली और हमारे खेतों की क्षमता के बारे में हमारी समझ बढ़ी। यूपीएल लिमिटेड के उत्पादों और सेवाओं की जानकारी मिली, साथ ही हमें यह भी पता चला कि कैसे इन उत्पादों और सेवाओं से हमें न केवल उपज बल्कि हमारी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम को मैं हमारे गांव में लाने पर मैं ज़रूर सोचूंगा और आज मैंने जो देखा और जाना उसके आधार पर तो मैं दूसरे गावों को भी इसकी सिफारिश करूंगा।"
अहमदनगर जिले के तालुका पारनेर के वाडुले गांव के सरपंच श्री. शिवाजी भापकर ने बताया, "खरीफ सीज़न के दौरान बोई गई हमारी प्याज़ की फसल का भारी नुकसान होता था। लेकिन पिछले खरीफ सीज़न में जब हमने प्याज़ की फसल में ज़ेबा का इस्तेमाल किया तो हमने पाया कि मिट्टी अच्छी मिलकर आयी जिससे बारिश के अतिरिक्त पानी को तेजी से बाहर निकालने में मदद होती थी और साथ ही पोषक तत्वों को जड़ों में इकठ्ठा किया जाता था। ज़ेबा के उपयोग से हमें अच्छी गुणवत्ता के प्याज़ की 20-30 प्रतिशत अधिक पैदावार मिली और साथ ही पके हुए प्याज़ के सड़ने के मामलों को कम करने में भी मदद मिली।”
उन्होंने आगे कहा कि, चिरस्थायी खेती के एक उदाहरण के रूप में ज़ेबा न केवल उपज को काफी हद तक बढ़ाता है बल्कि यह प्राकृतिक संसाधनों और खेती में लगायी जाने वाली उत्पादक सामग्री की बर्बादी को भी कम करता है, जिसके परिणामस्वरूप फसल का नुकसान कम होता है और किसानों की आय बढ़ती है।




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