मानव उत्थान सेवा समिति, शाखा कल्याण द्वारा गुरु-पूजा पर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न
कल्याण, 19 जुलाई 2026
मानव उत्थान सेवा समिति, शाखा कल्याण द्वारा परम पूज्य सद्गुरुदेव श्री सतपाल महाराज जी की असीम कृपा एवं प्रेरणा से पावन गुरु-पूजा (व्यास-पूजा) पर्व का आयोजन रविवार, 19 जुलाई 2026 को कर्पे हॉल, कर्पे वाड़ी, मसोबा चौक, कल्याण (पूर्व) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
महात्मा श्री आचार्यानन्द, श्री अंबालिका बाई जी एवं अन्य सभी पूज्य संतों ने अपने प्रेरणादायी सत्संग एवं प्रवचनों के माध्यम से गुरु की महिमा, गुरु-शिष्य परंपरा तथा मानव जीवन में सद्गुरु के महत्व पर अत्यंत सरल एवं सहज भाषा में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सद्गुरु ही मानव को अज्ञान से ज्ञान, अशांति से शांति तथा बंधन से मुक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। संत-महात्माओं ने अपने उद्बोधनों में प्रेम, सेवा, सदाचार, आत्मचिंतन, संयम एवं मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा, नैतिकता एवं आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित उपस्थित हुए। सभी भक्तों ने गुरु-पूजन में श्रद्धापूर्वक भाग लिया तथा सत्संग का लाभ प्राप्त किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से गुरुचरणों में अपनी कृतज्ञता अर्पित की।
आयोजन स्थल पर पूरे समय अनुशासन, सेवा-भाव एवं आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। मानव सेवा दल के स्वयंसेवकों ने आगंतुकों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण तथा अन्य व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट संचालन किया। सत्संग के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद (भंडारा) की व्यवस्था की गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।मानव उत्थान सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था का उद्देश्य सद्गुरु की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाना, आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना तथा समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव एवं नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाना है। संस्था समय-समय पर सत्संग, आध्यात्मिक प्रवचन, सेवा कार्य एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है।
कार्यक्रम के अंत में सभी संत-महात्माओं का सम्मान किया गया तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का अनुपम संगम सिद्ध हुआ तथा उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में सद्गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा और मानव सेवा का भाव और अधिक प्रगाढ़ कर गया।


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