“गैर-CINTAA सदस्यों को सहायता देने का एक भी सबूत पेश करके दिखाइए!” — प्रीति सप्रू की पूनम ढिल्लों को खुली चुनौती

CAWT–CINTAA विवाद ने लिया नया मोड़; पूर्व पदाधिकारियों से वित्तीय लेन-देन, समिति की वैधता और संगठन के दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल

CINTAA की पूर्व अध्यक्ष पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे द्वारा सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट (CAWT) पर गैर-CINTAA सदस्यों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के आरोपों को निराधार बताते हुए CAWT की अध्यक्ष प्रीति सप्रू ने इन आरोपों को चुनौती दी। उन्होंने पूनम ढिल्लों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने कार्यकाल के दौरान गैर-CINTAA सदस्यों को आर्थिक सहायता दिए जाने का एक भी ठोस प्रमाण प्रस्तुत करके दिखाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि CINTAA के संविधान के अनुसार चिकित्सा सहायता और दिवंगत सदस्यों के परिवारों को दी जाने वाली सहायता का उद्देश्य अपने सदस्यों को लाभ पहुंचाना है। साथ ही, CINTAA की वार्षिक आय का 20 प्रतिशत कल्याणकारी गतिविधियों के लिए आवंटित किया जाना आवश्यक है।

CAWT की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सप्रू ने CINTAA की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती पूनम ढिल्लों से उनके ढाई वर्ष के कार्यकाल का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि CINTAA ने अपने कार्यकाल के दौरान कल्याणकारी गतिविधियों पर कितनी राशि खर्च की तथा सदस्यों को कितनी चिकित्सा सहायता और दिवंगत सदस्यों के परिवारों को कितनी आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

इसके विपरीत, CAWT के ट्रस्टियों ने कल्याणकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के प्रयास किए हैं और जरूरतमंद CINTAA सदस्यों को चिकित्सा, आर्थिक तथा शैक्षणिक सहायता प्रदान की है।

श्रीमती सप्रू मुंबई के जुहू में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उनके साथ CAWT के ट्रस्टी दर्शन जरीवाला, सलाहकार गजेंद्र चौहान और CINTAA की पूर्व महासचिव उपासना सिंह भी उपस्थित थीं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्ताओं ने दोनों संगठनों के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता, संवैधानिक नियमों के अनुपालन, समिति की वैधता तथा संगठन की संपत्ति से जुड़े मामलों में स्पष्टता और जवाबदेही की मांग की।

प्रीति  सप्रू ने कहा—आरोप लगाने वाले ठोस सबूत पेश करें

प्रीति सप्रू  ने कहा,

“CAWT हमेशा CINTAA के सदस्यों और उनके परिवारों के साथ खड़ा रहा है। ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंद सदस्यों को आर्थिक, चिकित्सा और शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाती रही है। हम संगठन के संविधान और नियमों के अनुसार ही कार्य करते हैं। हमारे ऊपर आरोप लगाने वालों को केवल बयानबाजी करने के बजाय ठोस सबूत सामने रखने चाहिए। संगठन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले इन भ्रामक आरोपों के पीछे की सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए।”

समिति की वैधता और दस्तावेजों को लेकर गजेंद्र चौहान ने उठाए सवाल

CAWT के सलाहकार गजेंद्र चौहान ने समिति की वैधता और संगठन के दस्तावेजों को संभालने तथा उनके स्थानांतरण से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा,

“हमारा कहना है कि तत्कालीन समिति के 21 सदस्यों में से 11 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। ऐसी स्थिति में समिति को आगे कार्य करते रहने का अधिकार किसने दिया? संगठन के दस्तावेजों और निजी सामान को एक टेम्पो में भरकर ले जाने के आरोप भी गंभीर हैं। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसा किसके अधिकार और अनुमति से किया गया। किसी संगठन का नेतृत्व करने का अर्थ केवल सत्ता का उपयोग करना नहीं, बल्कि अपने सदस्यों के प्रति जवाबदेह होना और प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है।”

दर्शन जरीवाला ने CAWT द्वारा दी गई सहायता का विवरण प्रस्तुत किया

CAWT के ट्रस्टी दर्शन जरीवाला ने ट्रस्ट द्वारा वर्षों से सदस्यों को प्रदान की गई सहायता और उसके कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदस्यों को सहायता देने का कार्य कभी बंद नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि 7 अगस्त को समिति के निलंबन के बाद CINTAA के बैंक खाते फ्रीज हो जाने के बावजूद CAWT ने जरूरतमंद सदस्यों को सहायता प्रदान करना जारी रखा और इस कार्य में कोई रुकावट नहीं आने दी।

उपासना सिंह ने महासचिव की नियुक्ति पर उठाए सवाल

CINTAA की पूर्व महासचिव उपासना सिंह ने महासचिव पद पर पद्मिनी कोल्हापुरे की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं इस पद से इस्तीफा नहीं दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संगठन का संचालन किसी व्यक्ति की निजी इच्छा के अनुसार नहीं किया जा सकता।

उपासना सिंह ने कहा,

“पदाधिकारियों की नियुक्ति, इस्तीफे और महत्वपूर्ण निर्णय संगठन के संविधान में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही लिए जाने चाहिए।”

CINTAA के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग

उपासना सिंह ने CINTAA के बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए मुद्दों के अनुसार, CINTAA के पांच बैंक खाते बंद किए गए थे और सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) की राशि अन्य खातों में स्थानांतरित की गई थी।

उन्होंने मांग की कि संगठन के आधिकारिक खातों, संबंधित दस्तावेजों और धनराशि के उपयोग का पूरा विवरण जांच के लिए उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर इन लेन-देन का सत्यापन किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि CINTAA की धनराशि का उपयोग संगठन के संविधान और निर्धारित नियमों के अनुरूप हुआ है या नहीं।

कल्याणकारी योजनाओं, चुनाव प्रक्रिया और धन के उपयोग पर पारदर्शिता की मांग

ट्रस्टियों ने यह भी बताया कि उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं को साझा रूप से संचालित करने और जरूरतमंद सदस्यों तक सहायता पहुंचाने के लिए आपसी सहमति बनाने के प्रयास किए हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी सहायता निष्पक्षता और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार प्रदान की जानी चाहिए।

ट्रस्टियों ने चुनाव प्रक्रिया के संवैधानिक आधार, श्रम आयुक्त द्वारा जारी आदेश तथा विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से जुटाई गई धनराशि का विवरण सार्वजनिक करने की मांग से जुड़े मुद्दे भी उठाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित वक्ताओं ने दोनों संगठनों के कामकाज में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उठाए गए सभी सवालों का समाधान आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेजी साक्ष्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और नियमों के अनुरूप होना चाहिए।

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