मलेशियन 10 माह की बच्ची का सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट

बेबी नूर को कई बीमारियां थीं, जिसके चलते उसके जीवित रहने की संभावना बहुत कम हो गई थी

मुंबई, 27 अप्रैल 2020 :- आज चारों ओर कोरोनावायरस को लेकर शोर मचा है, रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग इस इन्फेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। इसी बीच मलेशिया से आई 10 माह की बच्ची, बेबी नूर का इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स में सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है। बेबी नूर को पैदा होने के ठीक बाद पीलिया हो गया था, जो धीरे धीरे बढ़ता चला गया और बाद में उसमें एक दुर्लभ लिवर एवं बाईल रोग बाइलरी एटेªेसिया का निदान किया गया, यह बीमारी दुनिया भर में पैदा होने वाले हर 12000 में से एक बच्चे में पाई जाती है। इसके अलावा नूर हेटरोटैक्सी से भी पीड़ित थी, जिसमें गर्दन और पेट के हिस्से के भीतरी अंगों की व्यवस्था असामान्य होती है। उसका पेट और लिवर बीचों-बीच था और दिल छाती के बीच में था। 2 माह की उम्र में बेबी नूर की सर्जरी की गई जिसमें लिवर की नीचली सतह को सीधे आंतों से जोड़ दिया जाता है। आंतों के गलत घुमाव को ठीक करने के लिए पेट की सर्जरी भी की गई। लेकिन दोनों सर्जरियां असफल रहीं।

डॉ अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर- सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट - हेपेटोलोजिस्ट, इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स ने कहा, ‘‘अगर सर्जरी से पीलिया ठीक नहीं होता तो लिवर ट्रांसप्लान्ट ही एकमात्र विकल्प होता है। नूर इसी श्रेणी में आ गई थी, सर्जरी असफल होने के कारण उसका पीलिया गंभीर हो गया था और वह लिवर फेलियर का शिकार हो गई थी, उसके पेट में फुलावट थी, लिवर के ठीक से काम न करने के कारण रक्तस्राव हो रहा था, लिवर सख्त हो गया था। उसे कई बार कुआलालम्पुर के अस्पताल में भर्ती किया गया। इलाज के दौरान फरवरी में ज़बरदस्त रक्तस्राव होने के कारण उसके बचने की उम्मीद जैसे खत्म हो गई। वह वेंटीलेटर पर थी, इसलिए उसे भारत लाने की योजना रद्द कर दी गई, लेकिन तुरंत सर्जरी की आवश्यकता को देखते हुए उसे अपोलो लाया गया।’

डॉ नीरव गोयल, सीनियर कन्सलटेन्ट एवं हैड, अपोलो लिवर ट्रांसप्लान्ट, हेपेटोबायलरी एण्ड पैनक्रियाटिक सर्जरी युनिट, इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स ने कहा, ‘‘परिवार के दिल्ली पहुंचते ही भारत सरकार ने मलेशिया से आए सभी यात्रियों को कम से कम दो सप्ताह के लिए क्वारंटाईन करने के लिए अडवाइज़री जारी कर दी। ऐसे में डॉक्टर और नर्सें दुविधा में पड़ गए क्योंकि तुरंत इलाज न करने से बेबी नूर की जान जा सकती थी। टीम ने तुंरत कार्रवाई की परिवार को क्वारंटाईन में भेजा और दो सप्ताह के बाद लिवर ट्रांसप्लान्ट की योजना बनाई गई।’’

31 मार्च 2020 को उसका लिवर ट्रांसप्लान्ट किया गया। उसकी मां ही डोनर थी। उसका वज़न 9 माह की उम्र में मात्र 6.5 किलो था। हमारे अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने बेहद जटिल परिस्थितियों के बीच इस मुश्किल सर्जरी को सफल किया। डॉ सिब्बल ने कहा, ‘’हम अपने मरीज़ों के भरोसे को महत्व देते हैं। हम बेहद मुश्किल लिवर ट्रांसप्लान्ट (जैसे 4 किलो से भी कम वज़न के बच्चे में), लिवर-किडनी ट्रांसप्लान्ट और मल्टी-ओर्गन ट्रांसप्लान्ट के कई मामलों में सफलतापूर्वक इलाज कर चुके हैं।’’

डॉ गोयल ने कहा बेबी नूर अब ठीक है, उसके सभी अंग ठीक से काम कर रहे हैं। लिवर ट्रांसप्लान्ट डॉ अनुपम सिब्बल, मेडिकल डायरेक्टर, अपोलो होस्पिटल्स ग्रुप और सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट एवं हेपेटोलोजिस्ट और उनकी टीम डॉ नीरव गोयल, डॉ स्मिता मल्होत्रा, डॉ विकास कोहली, डॉ वी अरूण कुमार, डॉ संजीव कुमार अनेजा के द्वारा किया गया।

बेबी नूर स्टाफ के सामने बेहद खूबसूरती से मुस्कराई, इस मुस्कराहट को देखकर माता-पिता सब दुख भूल गए। अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उसके माता-पिता मलेशिया लौटने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं।

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